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acid reflux disease
acid reflux disease

Saturday, February 4, 2017

समय पर काम

समय पर काम करना सीखो और प्राथमिकता को महत्व दो कौन सा काम पहले करना है।

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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 

 

Friday, February 3, 2017

"जीवन में कभी

"जीवन में कभी ऐसी घडियाँ भी आती है जब शब्द रुक जाते है, वाणी रुन्ध जाती है आप भाव विभोर होकर ईश्वर का धन्यवाद करना चाहते है, मगर वाणी साथ नहीं देती।

रोएं रोएं में कम्पन आ जाए, कुछ कह न पाएं , समझ न आए क्या कहुं ? मगर आभार व्यक्त करने का भाव जागृत हो जाए  वह प्रेम की अभिव्यक्ति है। भगवान की कृपाओं

के लिए जब शब्द न मिलें , होंठ हिलते रहें "प्रभु कैसे पुकारुं, क्या नाम दूं, किन शब्दों में तेरी प्रार्थना करुं। बुद्धि भी काम नहीं करती, बस तू मेरा है केवल मेरा है" जब शब्द

मिल न पाएँ और आप कहना चाहते हों यह स्वरुप है प्रेम का। प्रेम में आप शब्द नहीं कह पाते, पर आपकी क्रियाओं में प्रेम है।"

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परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

Thursday, February 2, 2017

प्रत्येक दिन




प्रत्येक दिन संकल्प कर के यात्रा शुरु करें। वादा अपने आप से कि आज का दिन जो प्रभु ने दिया है उसे मंगलमय बनाने का पूरा प्रयास करुंगा ।

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 परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 

Thursday, January 19, 2017

गुड़ खाने से 18 फायदे :

गुड़ खाने से 18 फायदे :

1- गुड़ खाने से नहीं होती गैस
की दिक्कत

2- खाना खाने के बाद अक्सर
मीठा खाने का मन करता हैं।
इसके लिए सबसे बेहतर है
कि आप गुड़ खाएं। 
गुड़ का सेवन करने से आप
हेल्दी रह सकते हैं

3 - पाचन क्रिया को सही रखना

4 - गुड़ शरीर का रक्त साफ
करता है और मेटाबॉल्जिम
ठीक करता है। 
रोज एक गिलास पानी या दूध
के साथ गुड़ का सेवन पेट को
ठंडक देता है। इससे गैस की
दिक्कत नहीं होती। 
जिन लोगों को गैस की परेशानी है, 
वो रोज़ लंच या डिनर के बाद
थोड़ा गुड़ ज़रुर खाएं..

5 - गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। 
इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों 
के लिए बहुत फायदेमंद है।
खासतौर पर महिलाओं के
लिए इसका सेवन बहुत
अधिक ज़रुर है.

6 - त्वचा के लिए, गुड़ ब्लड से
खराब टॉक्सिन दूर करता है,
जिससे त्वचा दमकती है और
मुहांसे की समस्या नहीं होती है।

7 - गुड़ की तासीर गर्म है,
इसलिए इसका सेवन जुकाम
और कफ से आराम दिलाता है। 
जुकाम के दौरान अगर आप
कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं
तो चाय या लड्डू में भी
इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

8 - एनर्जी के लिए -बुहत
ज़्यादा थकान और कमजोरी
महसूस करने पर गुड़ का
सेवन करने से आपका एनर्जी
लेवल बढ़ जाता है। 
गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे
शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता.
दिनभर काम करने के बाद
जब भी आपको थकान हो,
तुरंत गुड़ खाएं।

9 - गुड़ शरीर के टेंपरेचर को
नियंत्रित रखता है। 
इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं,
इसलिए दमा के मरीज़ों के
लिए इसका सेवन काफी
फायदेमंद होता है।

10 - जोड़ों के दर्द में आराम--
रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के
साथ अदरक का सेवन करें,
इससे जोड़ों के दर्द की
दिक्कत नहीं होगी।

11- गुड़ के साथ पके चावल
खाने से बैठा हुआ गला व
आवाज खुल जाती है।

12 - गुड़ और काले तिल के
लड्डू खानेसे सर्दी में अस्थमा
की परेशानी नहीं होती है।

13 - जुकाम जम गया हो, तो
गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी
बनाकर खिलाएं।

14 - गुड़ और घी मिलाकर खाने 
से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

15 - भोजन के बाद गुड़ खा
लेने से पेट में गैस नहीं बनती. 
16 - पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम
गुड़ के साथ लेने से पीलिया
रोग में लाभ होता है।

17 - गुड़ का हलवा खाने से
स्मरण शक्ति बढती है।

18 - पांच ग्राम गुड़ को इतने ही 
सरसों के तेल में मिलाकर खानेसे 
श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।

Friday, January 13, 2017

*बड़े बावरे हिन्दी के मुहावरे*

*बड़े बावरे हिन्दी के मुहावरे*
          
हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे है,
खाने पीने की चीजों से भरे है...
कहीं पर फल है तो कहीं आटा-दालें है,
कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले है ,
फलों की ही बात ले लो...


आम के आम और गुठलियों के भी दाम मिलते हैं,
कभी अंगूर खट्टे हैं,
कभी खरबूजे, खरबूजे को देख कर रंग बदलते हैं,
कहीं दाल में काला है,
तो कहीं किसी की दाल ही नहीं गलती,


कोई डेड़ चावल की खिचड़ी पकाता है,
तो कोई लोहे के चने चबाता है,
कोई घर बैठा रोटियां तोड़ता है,
कोई दाल भात में मूसरचंद बन जाता है,
मुफलिसी में जब आटा गीला होता है,
तो आटे दाल का भाव मालूम पड़ जाता है,


सफलता के लिए बेलने पड़ते है कई पापड़,
आटे में नमक तो जाता है चल,
पर गेंहू के साथ, घुन भी पिस जाता है,
अपना हाल तो बेहाल है, ये मुंह और मसूर की दाल है,


गुड़ खाते हैं और गुलगुले से परहेज करते हैं,
और कभी गुड़ का गोबर कर बैठते हैं,
कभी तिल का ताड़, कभी राई का पहाड़ बनता है,
कभी ऊँट के मुंह में जीरा है,
कभी कोई जले पर नमक छिड़कता है,
किसी के दांत दूध के हैं,
तो कई दूध के धुले हैं,


कोई जामुन के रंग सी चमड़ी पा के रोई है,
तो किसी की चमड़ी जैसे मैदे की लोई है,
किसी को छटी का दूध याद आ जाता है,
दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक पीता है,
और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है,


शादी बूरे के लड्डू हैं, जिसने खाए वो भी पछताए,
और जिसने नहीं खाए, वो भी पछताते हैं,
पर शादी की बात सुन, मन में लड्डू फूटते है,
और शादी के बाद, दोनों हाथों में लड्डू आते हैं,


कोई जलेबी की तरह सीधा है, कोई टेढ़ी खीर है,
किसी के मुंह में घी शक्कर है, सबकी अपनी अपनी तकदीर है...
कभी कोई चाय-पानी करवाता है,
कोई मख्खन लगाता है
और जब छप्पर फाड़ कर कुछ मिलता है,
तो सभी के मुंह में पानी आता है,

भाई साहब अब कुछ भी हो,
घी तो खिचड़ी में ही जाता है,
जितने मुंह है, उतनी बातें हैं,
सब अपनी-अपनी बीन बजाते है,
पर नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है,
सभी बहरे है, बावरें है
ये सब हिंदी के मुहावरें हैं...

ये गज़ब मुहावरे नहीं बुजुर्गों के अनुभवों की खान हैं...
सच पूछो तो हिन्दी भाषा की जान हैं...

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